यानी एक कोशिश…
मंगलवार, 3 अगस्त 2010
मंगलवार, 20 जुलाई 2010
रात की ताज़ा ख़बर
रात के चाँद की
पूनम के साथ मुलाक़ात होती है
भेड़िया रात चाहता है
नज़रें चाँद पर गड़ाए
मगर रात को चाँद चाहिए
भेड़िया नहीं
भेड़िया क्या करे? कहाँ जाए?
जब-जब रात चाँद को बुलाना ज़रूरी न समझे
तब-तब भेड़िए बाल खोल कर
ठण्डे झरने में नहाते हैं;
रोटी मज़्दूर और भूख का टूटता रिश्ता बचाने में लगी है
मगर भेड़िए तक्सीम हुए जाते हैं
बरहना-सर, आबला-पा, बेनज़रो-नियाज़-
घण्टियाँ घण्टों बजें पर एक भी बिल्ली नहीं आती
तेंदुए चूहे खाते हैं
और लाल-लाल होठों से
राम-राम जपते नहीं
अल्लाह को पुकारते नहीं
जागते नहीं
सोते नहीं
सिर्फ़,
ऊँघते रहते हैं -
डालों पर
जो झुक कर
संसद तक आ पहुँचती हैं।
यक़ीन करो
यह एक बुरा ख़ाब नहीं
न माज़ी है
न मुस्तक़बिल
सिर्फ़
रात की ताज़ा ख़बर है।
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इस रचना से -
रचनाकार की
राय मिलना ज़रूरी नहीं
बिना किसी बाहरी ज़ोर-दबाव के
बिना नशे की हालत में
अपने होशो-हवास में
बिना किसी मजबूरी के
यूँही
लिख दिया
ताकि सनद रहे
और
वक़्ते-ज़रूरत
किसी के किसी काम न आए
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बुधवार, 14 जुलाई 2010
नए सदस्य
श्री अरुण कुमार मुख्य सिगनल इंजीनियर हैँ और आज ही इनको पकड़ ला रहा हूँ इस लिँक परः
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एटीएम मशीन पर वारदात या वाकया
नीचे लिखे मामले में सारे चरित्र, घटनाएँ और वर्णन काल्पनिक नहीं हैं
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गुरुवार, 1 जुलाई 2010
और यह कविता (अ…कविता?)
स्वाद - गंध - स्पर्श से परे…
टिटहरी की उड़ान और गिलहरी की फ़ुदक,
बिम्ब अँधेरे में धुएँ के।
कुछ टूटता,
कुछ गलता,
कुछ चाहा सा हो गया अचानक चित्तीदार;
रोएँ उड़ रहे हैं-
किरनों के स्वयम्वर में,
लजाती हुई परम्परा-
रूठती है;
दिनमान निश्चित,
राका अशेष-
और समय चुप!
कराहते हुए सन्नाटे में,
सुलगती हुई बूँदें
अब शायद महक आए
किसी सड़ाँध से अलग;
शायद मोगरे की-
शायद पसीने की
आभार! -------------------------------------------
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बुधवार, 23 जून 2010
दादा-दादी:नाना-नानी <=> ग्रैण्डपैरेण्ट्स कौन होते हैं?
पढ़कर मैं पहुँच गया आठ बरस की उम्र में - और साठ बरस की उम्र में एक साथ!
देखिए आप पर क्या असर होता है-
ग्रैण्डपैरेण्ट्स कौन होते हैं?
ये एक औरत और एक आदमी होते हैं जिनके अपने कोई छोटे बच्चे नहीं होते। उनको दूसरों के छोटे बच्चे अच्छे लगते हैं।
इनमें से दादाजी आदमी होते हैं और दादी औरत।
जब ये हमारे साथ टहलने पार्क में जाते हैं तो हम लोग गेंद खेलते हैं और ये किसी सुन्दर फूल-पत्ती या चिड़िया या कीड़ों को भी देखते रहते हैं।
ये लोग हमें फूलों के रंग दिखाते हैं और चिड़ियों की बोली सुनाकर उनका नाम बताते हैं। फूल तोड़ने से मना भी करते हैं और ख़ुद तोड़ कर हमें दे भी देते हैं। दादाजी हमें पानी से खेलने को मना नहीं करते। कभी-कभी तो ख़ुद भी साथ में खेलने लगते हैं।
ये लोग हमें मना तो करते हैं, मगर ज़्यादा डाँटते नहीं। दादाजी तो बिल्कुल नहीं। मारते तो कभी नहीं। ये हमें दीवार और पेड़ पर चढ़ने से मना करते हैं, मगर ज़्यादा डाँटते नहीं।
ये लोग कभी नहीं कहते कि "जल्दी चलो - देर हो रही है"।
दादी मोटी होती हैं और नानी भी, मगर हम लोगों के जूते के फीते बाँधना इनको आता भी है और ये उतना झुक भी लेती हैं।
फिर उठ कर सीधे होते टाइम कमर पर हाथ रखकर ख़ूब "हाय-हाय" करती हैं।
दादाजी और नानाजी लोग चश्मा पहनते हैं और बड़ा ढीला सा पायज़ामा भी।
सबसे मज़े की बात यह है कि ये अपने दाँत और मसूढ़े निकाल लेते हैं।
ये लोग पापा-मम्मी से थोड़ा ज़्यादा अकलमन्द होते हैं क्योंकि जिन सवालों पर पापा-मम्मी कुछ नहीं बता पाते या डाँटने लगते हैं - ये लोग उन सवालों के जवाब में बड़ी अच्छी-अच्छी कहानियाँ सुनाते हैं।
सबके पास एक दादा-दादी और नाना-नानी ज़रूर होने चाहिए, क्योंकि बड़ों में से सिर्फ़ वही हैं जिनको हम लोगों के साथ टाइम बिताना टेलिविज़न देखने से ज़्यादा अच्छा लगता है।
जब हम लोग कुछ गन्दी बात भी कर देते हैं तो भी वो हमें प्यार ही करते हैं। जब मम्मी या पापा डाँटते-मारते हैं तो भी वो हमें बचाते हैं और होमवर्क में भी हमारी मदद करते हैं।
सोते समय कुछ खाने को माँगने पर वो नाराज़ नहीं होते।
दादाजी तो सबकुछ ठीक कर लेते हैं क्योंकि उन्होंने अब तक बहुत सी चीज़ें तोड़ी होंगी, दादी कहती हैं। अभी पिछ्ले हफ़्ते उनका चश्मा टूट गया था - वो ख़ुद उस पर बैठ गए थे। नानी को खाना बनाना मम्मी से ज़्यादा अच्छा आता है और वो खिलाती भी ज़्यादा प्यार से हैं। खाना छोड़ने पर नाराज़ नहीं होतीं - क्योंकि वो प्यार कर-कर के धोखे से सब खिला ही डालती हैं।
जब दादाजी का पेट ख़राब होता है तो सबसे ज़्यादा मज़ाक दादी उड़ाती हैं।
जब दादी हल्वा बनाती हैं तो दादाजी से ज़्यादा तारीफ़ पापा करते हैं।
जब मम्मी-पापा को कहीं घूमने जाना होता है तो मम्मी को दादा-दादी का घर पर रहना ज़्यादा अच्छा लगता है।
दादी मुझे रोज़ आइस्क्रीम दिलाती हैं।
मम्मी कहती हैं कि दादी मुझे बिगाड़ देंगी।
==========================हिमान्शु मोहन || Himanshu Mohan
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शुक्रवार, 18 जून 2010
मित्रता सप्ताह पर संदेश : आप अपने मित्रों को भेजें, अगर मुझे मित्र समझें तो मुझे भी :)
Subject: My wealth is U as best friend
Dear Friend, Give thousand chances to your enemy to become your friend, But don ' t give a single chance to your friend to become your enemy '
It ' s National Friendship Week.
If it comes back to you, then you will know you have a circle of friends.
My friends are my treasure, F - Few
R - Relations
I - In
E - Earth
N - Never
D - Die Thank you all for your wonderful and precious friendship !!!
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