मंगलवार, 20 जुलाई 2010

रात की ताज़ा ख़बर

भेड़िए की माँद से
रात के चाँद की
पूनम के साथ मुलाक़ात होती है
भेड़िया रात चाहता है
नज़रें चाँद पर गड़ाए
मगर रात को चाँद चाहिए
भेड़िया नहीं
भेड़िया क्या करे? कहाँ जाए?
जब-जब रात चाँद को बुलाना ज़रूरी न समझे
तब-तब भेड़िए बाल खोल कर
ठण्डे झरने में नहाते हैं;
रोटी मज़्दूर और भूख का टूटता रिश्ता बचाने में लगी है
मगर भेड़िए तक्सीम हुए जाते हैं
बरहना-सर, आबला-पा, बेनज़रो-नियाज़-
घण्टियाँ घण्टों बजें पर एक भी बिल्ली नहीं आती
तेंदुए चूहे खाते हैं
और लाल-लाल होठों से
राम-राम जपते नहीं
अल्लाह को पुकारते नहीं
जागते नहीं
सोते नहीं
सिर्फ़,
ऊँघते रहते हैं -
डालों पर
जो झुक कर
संसद तक आ पहुँचती हैं।
यक़ीन करो
यह एक बुरा ख़ाब नहीं
न माज़ी है
न मुस्तक़बिल
सिर्फ़
रात की ताज़ा ख़बर है।
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इस रचना से -
रचनाकार की
राय मिलना ज़रूरी नहीं
बिना किसी बाहरी ज़ोर-दबाव के
बिना नशे की हालत में
अपने होशो-हवास में
बिना किसी मजबूरी के
यूँही
लिख दिया
ताकि सनद रहे
और
वक़्ते-ज़रूरत
किसी के किसी काम न आए

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बुधवार, 14 जुलाई 2010

नए सदस्य

श्री अरुण कुमार मुख्य सिगनल इंजीनियर हैँ और आज ही इनको पकड़ ला रहा हूँ इस लिँक परः

arunprayag.posterous.com

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एटीएम मशीन पर वारदात या वाकया

ई-मेल पर प्राप्त। आज सुबह। एक अच्छा कारण - कि क्यों लड़कियों को जल्दी से शादी कर लेनी चाहिए - ताकि एटीएम से पैसे निकालने में सुविधा रहे!
:)
 
This is from a very Friend of mine With No dis-respect to themselves, it is fun but 90% ladies will not agree if asked for comments for themselves !  i dont do such silly things !!!
 
नीचे लिखे मामले में सारे चरित्र, घटनाएँ और वर्णन काल्पनिक नहीं हैं


MALE VS. FEMALE
AT THE ATM MACHINE

A new sign in the Bank Lobby reads: "Please note that this Bank is installing new Drive-through ATM machines enabling customers to withdraw cash without leaving their vehicles. Customers using this new facility are
requested to use the procedures outlined below when accessing their accounts.

After months of careful research, MALE & FEMALE Procedures have been developed. Please follow the appropriate steps for your gender."
MALE PROCEDURE:
1. Drive up to the cash machine.
2. Put down your car window.
3. Insert card into machine and enter PIN.

4. Enter amount of cash required and withdraw.
5. Retrieve card, cash and receipt.
6.. Put window up.
7. Drive off.
*******************************
FEMALE PROCEDURE:
Unfortunately, most of this part is the Truth.!!!!
1. Drive up to cash machine.
2. Reverse and back up the required amount to align car window with the machine.
3. Set parking brake, put the window down.
4. Find handbag, remove all contents on to passenger seat to locate card.
5. Tell person on cell phone you will call them back and hang up.
6. Attempt to insert card into machine.

7. Open car door to allow easier access to machine due to its excessive distance from the car.

8. Insert card.

9. Re-insert card the right way.

10. Dig through handbag to find diary with your PIN written on the inside back page.

11. Enter PIN.

12. Press cancel and re-enter correct PIN.

13. Enter amount of cash required.

14. Check makeup in rear view mirror.

15. Retrieve cash and receipt.


16. Empty handbag again to locate wallet and place cash inside.

17. Write debit amount in check register and place receipt in back of checkbook.


18. Re-check makeup.

19. Drive forward 2 feet.

20. Reverse back to cash machine.

21. Retrieve card.

22. Re-empty hand bag, locate card
holder, and place card into the slot provided!

23. Give dirty look to irate male driver waiting behind you.

24. Restart stalled engine and pull off.

25. Redial person on cell phone.

26. Drive for 2 to 3 miles.

27. Release Parking Brake.

वैधानिक चेतावनी:
इस क़िस्म के घटिया मज़ाक (जो दुर्भाग्य से सत्य हों) अपनी ज़िम्मेदारी पर करें।
SEND THIS TO WOMEN WHO NEEDS A LAUGH AND TO THE GUYS
YOU THINK WON'T DIE LAUGHING.
हिमान्शु मोहन || Himanshu Mohan
http://sukhanvar.blogspot.com
http://sangam-teere.blogspot.com

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गुरुवार, 1 जुलाई 2010

और यह कविता (अ…कविता?)

आज मैंने यह लिखा है…
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न जानो तुम
स्वाद - गंध - स्पर्श से परे…
टिटहरी की उड़ान और गिलहरी की फ़ुदक,
बिम्ब अँधेरे में धुएँ के।
कुछ टूटता,
कुछ गलता,
कुछ चाहा सा हो गया अचानक चित्तीदार;
रोएँ उड़ रहे हैं-
किरनों के स्वयम्वर में,
लजाती हुई परम्परा-
रूठती है;
दिनमान निश्चित,
राका अशेष-
और समय चुप!
कराहते हुए सन्नाटे में,
सुलगती हुई बूँदें
टुप-टुप-टुप…
अब शायद महक आए
किसी सड़ाँध से अलग;
शायद मोगरे की-
शायद पसीने की
आभार!

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आप चाहे कुछ भी टिप्पणी दें या न दें, मगर मैं ज़रूर टिप्पणी दूँगा - अपनी प्रतिक्रिया, अपनी ही इस रचना पर, और वही दूँगा जो अभी सोची है - ईमानदारी से - आप चाहे जो भी कहें!

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बुधवार, 23 जून 2010

दादा-दादी:नाना-नानी <=> ग्रैण्डपैरेण्ट्स कौन होते हैं?

ये मेरी रचना नहीं है। ईमेल पर मिली; जिनसे मिली - उनकी भी नहीं है। ई-पत्र में घोषित है कि यह किसी आठ बरस के बच्चे ने लिखी है - शायद गृहकार्य में दादा-दादी या नाना-नानी पर लेख के रूप में।
पढ़कर मैं पहुँच गया आठ बरस की उम्र में - और साठ बरस की उम्र में एक साथ!

देखिए आप पर क्या असर होता है-

ग्रैण्डपैरेण्ट्स कौन होते हैं?
(ग्रैण्डपैरेण्ट्स : दादा-दादी/नाना-नानी : आगे केवल दादा-दादी का ही प्रयोग रहेगा, संदर्भ दोनों का समझें)

ये एक औरत और एक आदमी होते हैं जिनके अपने कोई छोटे बच्चे नहीं होते। उनको दूसरों के छोटे बच्चे अच्छे लगते हैं।
इनमें से दादाजी आदमी होते हैं और दादी औरत।

इन लोगों को और कुछ काम नहीं करना होता। बस जब हम लोग मिलने आएँ तो हमसे मिलना होता है। जब हमारे घर आते हैं तो दादाजी को अख़बार पढ़ना और सब्ज़ी-फल लाना अच्छा लगता है। वो दूध भी लाना चाहते हैं, मगर दूध पैकेट में अपने आप आ जाता है।
ये लोग इतने बूढ़े होते हैं कि ज़्यादा दौड़ना या खेलना इनके लिए अच्छा नहीं होता। इनके लिए यही ठीक होता है कि ये हमें अपने साथ बाज़ार ले जाएँ और दूकानदार को हमारी चीज़ों के पैसे दे दें।

जब ये हमारे साथ टहलने पार्क में जाते हैं तो हम लोग गेंद खेलते हैं और ये किसी सुन्दर फूल-पत्ती या चिड़िया या कीड़ों को भी देखते रहते हैं।

ये लोग हमें फूलों के रंग दिखाते हैं और चिड़ियों की बोली सुनाकर उनका नाम बताते हैं। फूल तोड़ने से मना भी करते हैं और ख़ुद तोड़ कर हमें दे भी देते हैं। दादाजी हमें पानी से खेलने को मना नहीं करते। कभी-कभी तो ख़ुद भी साथ में खेलने लगते हैं।

ये लोग हमें मना तो करते हैं, मगर ज़्यादा डाँटते नहीं। दादाजी तो बिल्कुल नहीं। मारते तो कभी नहीं। ये हमें दीवार और पेड़ पर चढ़ने से मना करते हैं, मगर ज़्यादा डाँटते नहीं।

ये लोग कभी नहीं कहते कि "जल्दी चलो - देर हो रही है"।

दादी मोटी होती हैं और नानी भी, मगर हम लोगों के जूते के फीते बाँधना इनको आता भी है और ये उतना झुक भी लेती हैं।

फिर उठ कर सीधे होते टाइम कमर पर हाथ रखकर ख़ूब "हाय-हाय" करती हैं।
दादाजी और नानाजी लोग चश्मा पहनते हैं और बड़ा ढीला सा पायज़ामा भी।

सबसे मज़े की बात यह है कि ये अपने दाँत और मसूढ़े निकाल लेते हैं।
ये लोग पापा-मम्मी से थोड़ा ज़्यादा अकलमन्द होते हैं क्योंकि जिन सवालों पर पापा-मम्मी कुछ नहीं बता पाते या डाँटने लगते हैं - ये लोग उन सवालों के जवाब में बड़ी अच्छी-अच्छी कहानियाँ सुनाते हैं।

जब कहानी पढ़ने को कहो तो ये लोग जल्दी में लाइनें छोड़-छोड़ कर नहीं पढ़ते और अगर इनसे एक ही कहानी दोबारा पढ़ने को कहो तो बुरा भी नहीं मानते। कभी-कभी कहानी सुनते सुनते सो जाओ तो वहीं सुलाए रखते हैं - उठा कर अपने बिस्तर से हटाते नहीं हैं।
दादाजी को कॉमिक्स पढ़ना अच्छा भी लगता है।

सबके पास एक दादा-दादी और नाना-नानी ज़रूर होने चाहिए, क्योंकि बड़ों में से सिर्फ़ वही हैं जिनको हम लोगों के साथ टाइम बिताना टेलिविज़न देखने से ज़्यादा अच्छा लगता है।

जब हम लोग कुछ गन्दी बात भी कर देते हैं तो भी वो हमें प्यार ही करते हैं। जब मम्मी या पापा डाँटते-मारते हैं तो भी वो हमें बचाते हैं और होमवर्क में भी हमारी मदद करते हैं।

सोते समय कुछ खाने को माँगने पर वो नाराज़ नहीं होते।

दादाजी तो सबकुछ ठीक कर लेते हैं क्योंकि उन्होंने अब तक बहुत सी चीज़ें तोड़ी होंगी, दादी कहती हैं। अभी पिछ्ले हफ़्ते उनका चश्मा टूट गया था - वो ख़ुद उस पर बैठ गए थे। नानी को खाना बनाना मम्मी से ज़्यादा अच्छा आता है और वो खिलाती भी ज़्यादा प्यार से हैं। खाना छोड़ने पर नाराज़ नहीं होतीं - क्योंकि वो प्यार कर-कर के धोखे से सब खिला ही डालती हैं।

जब दादाजी का पेट ख़राब होता है तो सबसे ज़्यादा मज़ाक दादी उड़ाती हैं।

जब दादी हल्वा बनाती हैं तो दादाजी से ज़्यादा तारीफ़ पापा करते हैं।

जब मम्मी-पापा को कहीं घूमने जाना होता है तो मम्मी को दादा-दादी का घर पर रहना ज़्यादा अच्छा लगता है।

दादी मुझे रोज़ आइस्क्रीम दिलाती हैं।

मम्मी कहती हैं कि दादी मुझे बिगाड़ देंगी।

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हिमान्शु मोहन || Himanshu Mohan
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http://sangam-teere.blogspot.com

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शुक्रवार, 18 जून 2010

मित्रता सप्ताह पर संदेश : आप अपने मित्रों को भेजें, अगर मुझे मित्र समझें तो मुझे भी :)

Subject: मित्रता सप्ताह पर संदेश : आप अपने मित्रों को भेजें, अगर मुझे मित्र समझें तो मुझे भी :)
To: इन्दुपुरी गोस्वामी <puri.indu4@gmail.com>, आराधना 'मुक्ति' <guddubhargava@gmail.com>


Subject: My wealth is U as best friend


 Dear Friend,

Give thousand chances to your enemy to become your friend, But don ' t give a single chance to your friend to become your enemy '
cid:<a href=1.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="29" />It ' s 'World Best Friends Week ' send this to all your good friends. cid:<a href=1.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="29" />Even me, if I am one of them. See how many u get back.
cid:<a href=1.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="29" />If u get more than 3 you ' re really, a lovable person...... ......... .I am waiting
cid:<a href=2.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="300" />
cid:<a href=3.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="138" />
cid:<a href=4.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" />
It ' s National Friendship Week.

cid:<a href=5.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="114" />

Show your friends how much you care.
cid:<a href=6.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="363" />

Send this to everyone you consider a FRIEND!
cid:<a href=7.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="396" />

Even if it means sending it back to the person who sent it to you.
cid:<a href=8.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="98" />
If it comes back to you, then you will know you have a circle of friends.

cid:<a href=9.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="277" />

HAPPY FRIENDSHIP WEEK TO YOU!!!!!!
cid:<a href=10.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="320" />


My friends are my treasure,

F - Few
R
- Relations
I
-   In
E - Earth
N - Never
D - Die
   

Thank you all for your wonderful and precious friendship !!!


cid:<a href=11.4238272810@web50104.mail.re2.yahoo.com" width="400" />

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फूलों से भरा दामन : शेर-ओ-शायरी

फूलों से भरा दामन : शेर-ओ-शायरी
फूल खुशी देते हैं ना!

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